Gita Janmasthalee- Jyotisar
यह तीर्थ ब्रह्म सरोवर से लगभग 6 कि.मी. दूर पिहोवा राजमार्ग पर सरस्वती नदी के प्राचीन तट पर स्थित है। […]
यह तीर्थ ब्रह्म सरोवर से लगभग 6 कि.मी. दूर पिहोवा राजमार्ग पर सरस्वती नदी के प्राचीन तट पर स्थित है। […]
महानदी सरस्वती के तट पर स्थित यह तीर्थ पुराणों में अनरक तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है। इसी तीर्थ का
बाण गंगा नामक यह तीर्थ ब्रह्म सरोवर से लगभग 4 कि.मी. दूर दयालपुर नामक ग्राम मंे स्थित है। इस तीर्थ
ब्रह्म सरोवर की गणना कुरुक्षेत्र के प्रमुख तीर्थों में होती है। यह तीर्थ ब्रह्मा से सम्बधित होने के कारण ब्रह्म
सन्निहित तीर्थ की गणना कुरुक्षेत्र के प्राचीन एवं पवित्र तीर्थों में की जाती है। वामन पुराण के अनुसार यह तीर्थ
कुरुक्षेत्र का यह प्रमुख तीर्थ थानेसर शहर के पश्चिम में थानेसर-बगथला मार्ग पर राजा हर्ष के किले के दक्षिण में
महाभारत एवं पुराणांे में वर्णित कुरुक्षेत्र का यह पावन तीर्थ थानेसर शहर के उत्तर में स्थित है। इस तीर्थ का
कुरुक्षेत्र में झाँसा रोड पर स्थित यह शक्तिपीठ देश के 52 शक्तिपीठांे में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार
रन्तुक यक्ष को समर्पित यह तीर्थ कुरुक्षेत्र के बीड़ पिपली नामक स्थान पर सरस्वती के किनारे स्थित है। महाभारत के
लोकोद्धार नामक यह तीर्थ, जींद से लगभग 40 कि.मी. दूर लोधार ग्राम में स्थित है। इस तीर्थ का सम्बन्ध भगवान
कश/रामसर नामक यह तीर्थ, जींद से लगभग 28 कि.मी. की दूरी पर कुचराना ग्राम में स्थित है। महाभारत के अनुसार
कायशोधन नामक यह तीर्थ जींद से लगभग 19 कि.मी. दूर कसूहन ग्राम में स्थित है। कसूहन में स्थित इस तीर्थ