गीता महोत्सव में राजस्थानी स्वाद और लोक-संस्कृति का अनोखा संगम
कुरुक्षेत्र, 4 दिसंबर। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2025 में इस वर्ष राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति और देसी स्वाद का मनमोहक मेल पर्यटकों […]
कुरुक्षेत्र, 4 दिसंबर। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2025 में इस वर्ष राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति और देसी स्वाद का मनमोहक मेल पर्यटकों […]
कुरुक्षेत्र, 4 दिसंबर। अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव-2025 में ‘गोमय स्वावलंबी यात्रा’ विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही, जहाँ पंचगव्य से
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव और बनारस के कुशल शिल्पकार अकील अहमद का रिश्ता अब 25 वर्षों की खूबसूरत यात्रा बन चुका
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के पावन तट पर जब शास्त्रीय नृत्य की सुंदर मुद्राएँ, रंगों की दिव्यता और श्रद्धा का भाव
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के रंगों में घुला भांगड़ा का जोश पूरे वातावरण को ऊर्जा और उत्साह से भर देता है।
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की रंगीन छटा उस समय और मोहक हो जाती है, जब लोकनृत्य के कलाकार अपने हवा में
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की धड़कन उस समय और तेज़ हो उठती है, जब ढोल की गूंज और पारंपरिक नृत्य के
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में जनजातीय संस्कृति की अनोखी छटा ने सभी का मन मोह लिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की पावन भूमि पर विविध संस्कृति की मनमोहक छटा हर ओर बिखरी दिखाई देती है। जब पहाड़ी
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की पावन धरा पर जब लोकनृत्य की ताल गूंजती है, तो पूरा वातावरण उल्लास की लहरों से
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव—जहाँ मुस्कानें परंपरा की आभा में सजती हैं और लोकनृत्य की हर थिरकन संस्कृति की आत्मा को जीवंत
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव की रौनक में सजी ये मुस्कानें अपने भीतर लोक संस्कृति की चमक और श्रद्धा की लाली समेटे