




धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि आज एक अद्भुत दृश्य की साक्षी बनी, जब 21 हज़ार से अधिक विद्यार्थियों ने एक साथ बैठकर एक ही स्वर में गीता के श्लोकों का सामूहिक पाठ किया। यह केवल chanting नहीं, बल्कि अनुशासन, भक्ति और ऊर्जा का वह दिव्य संगम था जिसने वातावरण को ज्ञान, शांति और आध्यात्मिकता से मंत्रमुग्ध कर दिया। मानवता को जोड़ने वाली गीता की यह प्रतिध्वनि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को और भी प्रबल बनाती है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव–2025 का यह ऐतिहासिक क्षण सदैव स्मरणीय रहेगा।