International Gita Mahotsav

 

INTERNATIONAL GITA MAHOTSAV

(5 to 25 December 2026)

Kurukshetra, Haryana

गीता महोत्सव का मुख्य आकर्षण बना धोरों की धरती राजस्थान की लोक कला सपेरों का बीन बाजा


गीता महोत्सव के इस मंच पर इन्ही कार्यक्रमों के तहत धोरों की धरती व गौरवमयी इतिहास की पहचान रखने वाले राजस्थान की लोक कला कालबेलियों का बीन-बाजा की धुन मुख्य आकर्षण का केंद्र बन रही है। कालबेलियों की लोक कला एवं कालबेलिया नृत्य को 2010 में केन्या के नैरोबी में यूनेस्को द्वारा अमृत सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया। इसी कालबेलिया समाज की गुलाबो सपेरा को उनके कालबेलिया नृत्य के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। बीन बाजा पार्टी के सपेरों की पारंपरिक पोशाक, बीन चिमटा, ढोलक, तुम्बी आदि वाद्य यंत्रों की धुन ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसी बीन की धुन में महोत्सव में आने वाले पर्यटक मदमस्त होकर नाल रहे है।
बाजा पार्टी के सरदार (संयोजक) इंद्रजीत ने बताया कि बीन बजाकर सपेरों के खेल दिखाना सपेरों का मुख्य पेशा था। लेकिन वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 व 2023 के बाद सांपों का पकड़ना अवैध कर दिया गया। जिनके चलते ये अपने पारंपरिक कला के पेशे से वंचित हो गए व आर्थिक दशा दयनीय हो गई। इसलिए अपनी जीविका के लिए शादी-विवाहों व अन्य उत्सवों पर बीन बजाकर अपना पेशा चला रहे है। लेकिन आधुनिक युग की चकाचौंध व डीजे जैसे वाद्य मशीनरी के आगे बीन बजाना भी फीका पड़ गया है। यह पारम्परिक कला लुप्त होने की कगार पर है इसलिए इसके विकास के लिए सरकार और समाज दोनों का योगदान आवश्यक है। सरकार को इनके रहने, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की तरफ ध्यान देना चाहिए। वहीं समाज अगर आधुनिक डीजे जैसे सिस्टम को त्यागकर शादी-विवाहों में बीन बाजा पार्टी को बुलाए तो इनकी जीविका आसान हो जाएगी।

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