



अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव – लाड़वा की शाम आज एक भव्य, दिव्य और अविस्मरणीय क्षण की साक्षी बनी, जब सूफी गायक कंवर ग्रेवाल जी ने मंच पर अपनी आत्मिक आवाज़ से सुरों की ऐसी साधना रची, जिसने पूरे माहौल को भक्ति, ऊर्जा और आनंद से भर दिया। उनकी तीव्र आवाज़, भावपूर्ण प्रस्तुति और सूफियाना अंदाज़ ने हर श्रोता के हृदय को छू लिया। जैसे ही उनके सुर लाड़वा की पवित्र भूमि पर उतरे, पूरा पंडाल एक स्वर में झूम उठा—कहीं ध्यान, कहीं भाव, कहीं भक्ति… हर चेहरा मंत्रमुग्ध दिखाई दिया। कंवर ग्रेवाल जी ने यह सिद्ध कर दिया कि जब संगीत भक्ति से मिलता है, तो वह केवल मनोरंजन नहीं—एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है। लाड़वा ने आज एक ऐतिहासिक, यादगार और भावपूर्ण संध्या को अपने नाम किया।