International Gita Mahotsav

 

INTERNATIONAL GITA MAHOTSAV

(5 to 25 December 2026)

Kurukshetra, Haryana

Dadhnamochan Tirth, Rasina


द्धणमोचन नामक यह तीर्थ कैथल से लगभग 25 कि.मी. दूर रसीना ग्राम में स्थित है। इस तीर्थ का उल्लेख पौराणिक साहित्य के अन्तर्गत वामन पुराण, ब्रह्म पुराण तथा मत्स्य पुराण में किया गया है। पौराणिक साहित्य में कहीं इसे ऋणमोचन तो कहीं ऋणप्रमोचन कहा गया है लेकिन इसका शाब्दिक अर्थ ऋणों से मुक्त करने वाला ही है।
ब्रह्म पुराण में इस तीर्थ से सम्बन्ध्ति कथा के अनुसार प्राचीन समय में कक्षीवान् नामक राजा के दो पुत्र थे। ज्येष्ठ पुत्र पृथुश्रवा ने विरक्ति के कारण न तो विवाह ही किया और न अग्निपूजन ही। कनिष्ठ पुत्र ने योग्य होते हुए भी स्वयं विवाह या अग्निस्थापनादि कर्म नहीं किया। ये देख पितृगणों ने कक्षीवान् के उन दोनों पुत्रों को तीन ऋण- देव ऋण, पितृ ऋण तथा ऋषि ऋण से मुक्ति पाने के लिए विवाह करने का परामर्श दिया। लेकिन बड़े पुत्र ने विरक्ति के कारण तथा छोटे पुत्र ने बड़े भाई के अविवाहित रहने पर छोटे भाई के विवाह से उत्पन्न पाप या दुख दोष के कारण विवाह करना अस्वीकार कर दिया।
उन दोनों के उद्धार के इच्छुक पितरों ने तब उन्हें पवित्र गौतमी के तट पर जाकर सर्वमनोरथ प्रदाता उस पुण्यसलिला नदी में श्रद्धापूर्वक स्नान एवं तर्पण करने को कहा जिससे ज्येष्ठ भ्राता पितृऋण से मुक्त हो जाएगा तथा कनिष्ठ को परिवित्ति दोष नहीं लगेगा।
पितरों की आज्ञा से वैसा ही करने पर वह पृथुश्रवा अपने पिता कक्षीवान के ऋण से उऋण हो गया। तभी से वह तीर्थ ऋणमोचन के नाम से विख्यात हो गया:
ततः प्रभृति तत्तीर्थं ऋणमोचनमुच्यते ।
श्रौतस्मार्तऋणेभ्यश्च इतरेभ्यश्च नारद ।
तत्र स्नानेन दानेन ऋणी मुक्तः सुखी भवेत् ।
(ब्रह्म पुराण 99/12)
अर्थात् ऋणमोचन तीर्थ श्रौत, स्मार्त अथवा अन्य सभी प्रकार के ऋणों से मनुष्य को मुक्त कर देता है। उस तीर्थ में स्नान एवं दान से ऋणी मनुष्य ऋण से मुक्त हो सुखी हो जाता है।
इस तीर्थ के सरोवर की खुदाई से दो प्रतिहारकालीन (9-10वी शती ई.) विष्णु प्रतिमाएं प्राप्त हुई हंै जो वर्तमान में कुरुक्षेत्र के श्रीकृष्ण संग्रहालय में प्रदर्शित हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top
Enable Notifications OK No thanks