International Gita Mahotsav

 

INTERNATIONAL GITA MAHOTSAV

(5 to 25 December 2026)

Kurukshetra, Haryana

48 कोस तीर्थों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि के पवित्र तीर्थों पर हरियाणा की लोक संस्कृति की गूंज सुनाई देती है। महोत्सव हरियाणवी संस्कृति, अध्यात्म और लोक परंपरा का जीवंत उत्सव बनकर उभर रहा है। यह आयोजन न केवल लोक कलाकारों को मंच प्रदान करता है बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊर्जा भी देता है।
महोत्सव के दौरान हरियाणा कला परिषद की ओर से 48 कोस भूमि में स्थित विभिन्न तीर्थों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। परिषद की ओर से अनुबंधित कलाकारों ने हरियाणवी नृत्य, रागनी, भजन इत्यादि की प्रस्तुतियों से पर्यटकों का मन मोहा। हरियाणा कला परिषद द्वारा 48 कोस भूमि में कुरुक्षेत्र तथा कैथल जिले के लगभग 80 तीर्थों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गई। जिसमें प्रदेश के लोक कलाकार दलों ने अपनी कला को प्रदर्शित किया।
कुरुक्षेत्र जिले में भूरिश्रवा तीर्थ भौर सैयदा पर विकास सातरोड़, विष्णुपद तीर्थ घराड़सी में निशांत शर्मा, मणिपुरक तीर्थ मुर्तजापुर में सुशील कुमार, सोमतीर्थ गुमथला गढ़ू में बससेर सिंह और त्रिपुरारि तीर्थ तिगरी में पुनीत कौर ने अपनी लोक शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इसी प्रकार रेणुका तीर्थ अरणैचा में कृष्ण शर्मा, कुलोतारण तीर्थ किरमच में सुरेश कुमार तथा लोमश तीर्थ लोहारमाजरा में दिलावर शर्मा की प्रस्तुतियों ने समा बांध दिया। इसके अलावा बारणा के बरणावती, अभिमन्यपुर (अमीन) के अदिति तीर्थ, संधोली के त्रिसंध्या देव तीर्थ, नरकातारी में भीष्मकुण्ड, फरल में फल्गु तीर्थ में सांस्कृति कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं कैथल के डीग में स्थित कण्व ऋषि तीर्थ से कार्यक्रमों की शुरुआत की गई। जिसमें दिनेश कुमार और उनके दल ने धार्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों का मन मोहा। वहीं सोम तीर्थ, सैंसा में मनोज जाले तथा बटेश्वर तीर्थ, बरोट में निखिल एवं दल ने अपनी प्रस्तुतियों से गीता महोत्सव का महत्व समझाया। कोटिकूट तीर्थ क्योडक में भाल सिंह और उनके साथियों ने अपने भजनों की प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बनाया। इसी तरह सूर्यकुंड, सजूमा में सुमित कुमार, पवनहृदय तीर्थ पबनावा में अनिल भारती, गढ़रथेश्वर तीर्थ कौल में बलराज और इक्षुमति तीर्थ पोलड़ में तरुणा शर्मा तन्नू ने दर्शकों का दिल जीता। अन्य तीर्थों डयोडखेड़ी, प्यौदा, गुलडेहरा, साकरा, गुहना, रसीना और मांगना में भी कलाकारों ने अनुपम कला का प्रदर्शन किया।

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