सांस्कृतिक रंगों और पारंपरिक कला – अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में यह सांस्कृतिक और रंगीन दृश्य पारंपरिक कला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। विभिन्न लोक […]
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में यह सांस्कृतिक और रंगीन दृश्य पारंपरिक कला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। विभिन्न लोक […]
ब्रह्मसरोवर तट पर गूँजती जय हनुमान की प्राणवायु ध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्ति, ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में ब्रह्मसरोवर की पावन धरा पर आरती की दिव्य ज्योत प्रज्वलित होने को है। क्षण भर
शिल्प प्रदर्शनी 2025 में हस्तनिर्मित फर्नीचर की अनोखी नक्काशी और शिल्पकारों की महीन कला ने आगंतुकों का मन मोह लिया।
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में दूर तक फैली श्रद्धालुओं की भीड़, सजे हुए घाट और भव्य मंदिर महोत्सव को एक
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में परंपरागत ‘पूँगी’ की सुरमयी तान कलाकार की कला और लगन से महोत्सव में एक अनूठी
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में नगाड़ों और झांझ की गूंजती धुनों पर कलाकारों द्वारा छेड़ी गई ताल ने पूरे वातावरण
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में डूबते सूरज की सुनहरी किरणों से नहाया ब्रह्मसरोवर और उसके बीच स्थित भव्य मंदिर ने
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में ब्रह्मसरोवर के तट पर परंपरागत वाद्यों की गूंज ने पूरे वातावरण में उत्सव, भक्ति और
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण के मधुर भजन ने सरोवर तट पर छाई भक्ति-रस की अनूठी छटा प्रस्तुत की।
ब्रह्मसरोवर की रात, हरी पत्तियों की छाया और स्वर्णिम मंदिर की झिलमिलाती रोशनी—यह दृश्य केवल आँखों को नहीं, बल्कि मन
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग और आदर्शों का जीवंत अनुभव है। मंच पर राम,